होते हैं बड़े दिल के काले

होते हैं बड़े दिल के काले
ये चिकनी चुपड़ी बातों वाले

देते अच्छे हैं तो सुनाई
मन के भीतर कपट है रखते
ये बात याद रखीयौ मेरे भाई

खुद भलै ही दुख रहेगा
इनका भला तू खुब करेगा
मतलब पूरा होने पर भी
इसके लिए तू डूब मरेगा

तेरे पेट का भेद ले लेंगे
तेरे जीवन से फिर खेलेंगे
तेरे मुंह पे तो मीठा बोलेंगे
पीठ के पीछे हर किसी से
ये तेरे घर के राज खोलेंगे


कड़वे बोल बोलने वाले
बुरे देते हैं तो सुनाई
मन के सच्चे होते हैं
ये कड़वा बोलने वाले मेरे भाई

जो बोलेंगे मुंह पे बोलेंगे
राज न किसी से खोलेंगे
बात करेंगे भले की तेरे
चाहे किसी बैर ले लेंगे

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हर हाल में साथ हम हो

दिन हो या रात हो
लबों पे तेरी ही बात हो

सुख हो या दुख हो
बस एक तू ही सम्मुख हो

सुबह हो या शाम हो
ये जिंदगी बस तेरे नाम हो

अमीर हो या गरीब हो
एक तू ही मेरे करीब हो

खुशी हो या ग़म हो
हर हाल में साथ हम हो



ए जिंदगी जरा मुस्कुरा दे

ए जिंदगी जरा मुस्कुरा दे
हम दोनों यहां अकेले हैं
सब पैसों के यार यहां पे
हम अपनों में अकेले हैं

कब तक यूं अफसोस करेंगी
गमों के बादल अभी घनैरै हैं
यकीं था ज्यादा तुमको जिनपर
वहीं निकले तेरे लुटेरे हैं
गमों के बादल अभी घनैरै हैं

ए जिंदगी जरा मुस्कुरा दे
हम दोनों यहां अकेले हैं
© चन्द्र पाल सिंह

राजनीति चमकाने को / Rajniti Chamkane Ko


देश में दंगे हैं कराते
खोई सत्ता पाने को
भाई को भाई से हैं लड़ाते
खोई राजनीति चमकाने को
विदेशी पैसा हैं लगवाते
किसान आंदोलन भड़काने को
आतंकी झंडा हैं लहराते
निचा दिखाने भारत को
खाने-पीने का लालच देते
किसान आंदोलन में भिड बुलाने को
पत्थर फेंक भाग जाते
अपनी करतूत छुपाने को
सवाल पूछो आंख दिखाते
पाक प्रेमी भेद छुपाने को
जय श्री राम कहते नहीं
अपना पाक प्रेम दिखने को
अल्लाह अल्लाह करते रहते
खुद को सेक्युलर बताने को
देश से गद्दारी हैं करते
अपना छुपा एजेंडा चलाने को
आतंकियों को वकील हैं दिलाते
देश में दहशतगर्दी कराने को

वो रातें

खुशबू तेरी सांसों की जाती नहीं
यादें तेरी जो दिल से मिटती नहीं
चाहकर भी मैं भुल सकता नहीं
वो रातें जो मुझसे अब कटती नहीं

Chander Pal Singh poetry

यादों में ही सही करीब तो होता हुं

तेरी यादों के बीना
बदनसीब सा होता हुं
यादों में ही सही
करीब तो होता हुं

तु नहीं तेरी यादें तो हैं
इनमें जीने के वादें तो हैं
बस यही सोच कर
खुशनसीब सा होता हुं
यादों में ही सही
करीब तो होता हुं

तेरी यादों के सहारे
जीना सीख लिया है
वरना इनके बिना तो
बदनसीब सा होता हुं
यादों में ही सही
करीब तो होता हुं

तु बेवफा नहीं
इतना जानता हूं मैं
दिल ही दिल में तुझे
अपना मानता हूं मैं

तू जहां कहीं भी होगी
याद मेरी आती तो होगी
रह न सके साथ में दोनों
ये मजबूरियां सताती तो होगी
रोज न सही कभी कभी
याद मेरी आती तो होगी

होगी तेरी भी कोई मजबूरी
जाना हुआ जो तेरा जरूरी


सच की राह इतनी आसान नहीं

सच की राह इतनी आसान नहीं
के जो तुम मेरे साथ चल सको
सच की राह बलिदान है मांगती
पर तुम वो नहीं जो बलिदान दे सको

सच की राह इतनी आसान नहीं
के जो तुम मेरे साथ चल सको

ये वो राह नहीं जो आराम से कट जाए
जिंदगी के सफर में यहां हर कोई मिट जाए

सच कि राह पर चलने वाले
होते बड़े ही अजीब हैं
खुद के दुख को भुलकर
संवारते औरों का नसीब हैं

अपने दुखों को छुपाते हैं
भले अकेले में रो जातें हैं
औरों का दूख देख
वो खुद को दुख में पाते हैं
इसलिए सच की राह पर चलने वाले
सदियों में एक आद बार धरती पे आते हैं

कपट किसी से करते नहीं
रूखी सूखी खाते हैं
मेहनत मजुरी से जो मिले
बस उसी में घर चलाते हैं

हक किसी का मारते नहीं
इमानदारी से जिवन बिताते हैं
इसलिए सच की राह पर चलने वाले
सदियों में एक आद बार धरती पे आते हैं

पता नहीं क्यों

पता नहीं क्यों
यादों में तेरी
गुजर जाती है
मेरी हर रात यूं ही

जुबां खामोश रहती
हरदम फिर भी
तेरे नज़र होती है
मेरी हर बात यूं ही

मैं लिखता रहा वो चुराता रहा

कहते हैं सोशल मीडिया से दूरियां दूर होंगी
इसलिए दूरियां दूर करने में लगा रहा
अपने सारे गाने सोशल मीडिया पर शेयर करने में लगा रहा
शायद कोई देख ले एक दिन मेरा भी नाम होगा कभी एक दिन

लेकिन हमें क्या पता था
मेरे गाने चुराने का जाल था ये
फिल्मी गीतकारों के लिए बना बनाया माल था ये

मैं लिखता रहा वो चुराता रहा
मैं मिटता रहा वो मिटाता रहा
मैं गिरता रहा वो गिराता रहा
मैं रोता रहा वो मुस्कुराता रहा

मैं खुद पर खफा होता रहा
खुद को हर दिन कोसता रहा
खुद पर विश्वास खोता रहा
मेरे साथ ऐसा ही क्यों होता रहा

आज जो नजरें खुली
खुद पर हेरान होता रहा
मेरे लिखे सारे गाने
सारा जहां सुनता रहा

दुख होता है ये जानकर
किसी चोर को लेखक
ये जहां मानता रहा

असली लेखक कहीं
अकेले में खुद को
कसुरवार मानता रहा

Written By चंद्र पाल सिंह
Original writer of: Kabir Singh, Gully Boy, Bahubali, Aashiki 2, Agnipath 2, Kesari and many more…

देखूं तो क्या देखूं

कोरोना की मार देखूं
गरीबी की हार देखूं

भूखे पेट की आग देखूं
फैलती महामारी का राग देखूं

झूठे का बोलबाला देखूं
सच्चे का मुंह काला देखूं

राजनीति का नंगा नाच देखूं
मरती हथनी के मुंह में धधकती आग देखूं

चोर गीतकार की होती जय जय कार देखूं
असली गीतकार के जीवन में होती हार देखूं

देखूं तो क्या देखूं