हम नदी के दो किनारे

हम नदी के दो किनारे
फूटे देखो भाग हमारे

संग हैं पर दूर हैं
मिलन को मजबुर हैं

जीवन भर हम मिल ना पाएं
सदियों से आंसू बहाएं
बाढ़ भी हमें दूर कर दे
मिलना हमारा मजबूर कर दे
अपना दुखड़ा किसको सुनाएं

जब हम दूर होते हैं
मिलने से भी मजबूर होते हैं
तब तुम हमसे जीवन पाते हो
ऐ हाड मांस के इंसान
खुद पर इतना क्यों इतराते हो

ए इन्सान तुम तो दुआ करो
हम कभी एक हो ना जाए
जब जब हम एक हुऐ हैं
इस धरा पर मानव जाति
कदापि जीवित रह ना पाए

हमें एक कर खुद का विनाश
खुद तुम कर रहे हो
दो किनारों को हरी भरी धरा से
जानबूझकर तुम गुम कर रहे हो

जिसको देखो बस अपने
फायदे की बात करता है
आज का इंसान सिर्फ
पैसों के लिए दिन रात मरता है

सोचो अगर प्रकृति भी
तुम्हारी तरह अपने लिए
सौचने लगे तो क्या होगा

स्वच्छ शीतल वो निर्मल जल
जो हमें प्रिय था
कभी हम दो किनारों के बिच सक्रिय था
उसमें ज़हर क्यों घोला तुमने

बहती नदी में थोड़ा सा
अगर गंद बह जाए तो
कोई नुक्सान नहीं होता
ऐसा क्यों बोला तुमने

शहरों के गंदे नालों को
पवित्र नदियों में क्यों खोला तुमने

सारे जीव जगत की
जीवन दायिनी नदी को
बहते नाले के साथ
क्यों तोला तुमने

इस धरा पर नदी का काम
क्या सिर्फ तुम्हारे पापों को ढोना है
मानव जात की इन्हीं ना समझी का
हम दो किनारों को जीवन भर रोना हैं

वो छोटे बच्चे
जो हमारे बीच कभी नहाए थे
गर्मियों की छुट्टी में
शहर छोड़ गांव में कभी आए थे

आज वो भी रो रहे हैं
हमारे बीच का पानी देख कर
गंदा नाला हो गई
नदी की कहानी देख कर

आंखों के आंसुओं को छोड़ो
अंदर की आत्मा भी रोती है उनकी
दम तोड़ती नदी की जिंदगानी देख कर

अब तुम कहोगे

हमें इससे क्या फर्क पड़ता है
वो होगा कोई पागल
जो इन बातों पर लड़ता है

हम तो समझदार हैं
ऐसी बातों में अपना वक्त
जाया नहीं करते हम

हमें तो सिर्फ पैसे बनाने हैं
हमें नदी से क्या लेना
नदी का जो काम है
वो अपना काम कर रही है
जिंदगी जैसी थी वैसी आगे बढ़ रही है

सरकारें भी कमाल करती हैं
चुनाव से पहले नदी माता है
चुनाव के बाद नदी का हाल
किसको याद आता है

इधर का पैसा उधर
और उधर का पैसा इधर
बस यही सब कुछ करने में
आईं गई सभी सरकारों का
पांच साल का समय
बस यूं ही गुजर जाता है

नदी का जो पानी गंदा था
इनकी बदौलत और गंदा हो जाता है





Be careful of those who speak sweet

Sometime in our life we can’t really think who should we believe or who shouldn’t

Because we hate those people who are are very hard in words to us but we like those people who speak nicely with sugar coated words words.

But in reality people who been hard to us or were not soft on us were good people cause they acted badly for our benefit or for our future.

And in reality people those who are close to you as a friend or coworker decided to lie to you and hide their true feelings towards you and the day you learn their reality you say what’s written in the pic

Listen to him he is saying something

Listen to him he is saying something

After watching conditions on earth he felt very badly how people have turned this beautiful mother earth in a garbage land. He is in so much of pain that his eyes are dripping some kind of blood from his eyes. Within the last two or three years he was sending us the signals what is going to happen but we were so ignorant that we just imagined it as another news from any news channel

We have been informed and we have been told how should we live on earth but still we think this life will move on the way we want do the things the way we want burning the fuel the way we want suffocating Mother Earth the way we want

The kind of pandemic we all are living in is the sign that we human have crossed our limits and now he is showing us what can he do to us because he down to earth to bring balance in nature and humanity

सुर्ख लाल

कल रात तेरी यादों में फिर वही खयाल आया
तू क्यों दूर है मुझसे फिर वही सवाल आया

दिल तेरा भी चाहता है दिल मेरा भी चाहता है
हालात दोनों के देख फिर वही मलाल आया

तड़पती तू भी है तड़पता में भी हुं
लापता तू भी है लापता में भी हुं
अंज़ाम अपनी अधूरी कहानी का देख
आंखों में आसूं फिर वही सुर्खलाल आया

बेसबर हूं मैं

आजकल तेरी यादों में
मसरूफ इस कदर हूं मैं
इस दुनिया में क्या हो रहा
उस सबसे बेखबर हुं मैं

हमें कुछ मिले ना मिले
बस खबर तेरे आने की मिले
इसी चाहत में बेइंतहा बेसबर हूं मैं

अब सोच रहा हूं

थक सा गया हूं औरों के लिए लिखते लिखते
अब सोचा है कि खुद के लिए भी लिख दूं

पक सा गया हूं हकीकत लिखते लिखते
अब सोच रहा हूं औरों की तरह थोड़ा झूंठ भी लिख दूं

रुक सी गई है कलम अरमान लिखते लिखते
अब सोचा है खुदा का फरमान ही लिख दूं

झुक सी गई है नजर अपना हक मांगते मांगते
अब सोचा है चोरों की जिंदगी में आने वाला तूफान ही लिख दूं

Baarish Ki Jaaye | B Praak Ft Nawazuddin Siddiqui

ना दुनिया के लिए लिखते ना मेरे लिए लिखते
गालिब जिंदा होते तो तेरे लिए लिखते

जिसने भी लिखा है क्या खूब लिखा है
बहुत ही बेहतरीन हाले महबूब लिखा है

फिर वही हकीकत बयां कर रहा हूं मैं
तुमको सच बताकर कुछ नया कर रहा हूं मैं

जो लिखता है वो दिखता नहीं
और जो दिखता है वो लिखता नहीं

ए गुमनाम शायर 
तेरी शायरी को सलाम

इतना कुछ लिखने के बाद भी
तुझे जो गुमनामी मिली
तेरी उस गुमनामी को सलाम

औरों को खिताब
दिलाने के बाद भी
तुझे जो बदनामी मिली
तेरी उस बदनामी को सलाम

हम नदी के दो किनारे फूटे देखो भाग हमारे

हम नदी के दो किनारे
फूटे देखो भाग हमारे

जीवन भर हम मिल ना पाए
सदियों तक आंसू बहाए
बाढ़ हमें और दूर कर जाए
अपना दुखड़ा किसको सुनाएं

जब हम दूर होते हैं
मिलने से भी मजबूर होते हैं
तुम हमसे जीवन पाते हो
ऐ हाड मांस के इंसान
खुद पर इतना क्यों इतराते हो

ए इन्सान तुम तो दुआ करो
हम कभी एक हो ना जाए
जब जब हम एक हुऐ हैं
तब तब मानव सभ्यता
इस धरा पर जीवित रह ना पाए

हमें एक कर खुद का विनाश
खुद तुम कर रहे हो
दो किनारों को हरी भरी धरा से
क्यों गुम कर रहे हो

जो पानी हमें प्रिय था
उसमें ज़हर क्यों घोला तुमने
बहती नदी में थोड़ा गंद बहा दो
ऐसा क्यों बोला तुमने

वो छोटे बच्चे जो हमारे बीच कभी नहाए थे
गर्मियों की छुट्टी में शहर छोड़ गांव में आए थे

आज वो रो रहे हमारे बीच का पानी देख कर
गंदा नाला हो गई नदी की कहानी देख कर
आंखों के आंसुओं को छोड़ो
अंदर की आत्मा भी रोती है उनकी
दम तोड़ती नदी की जिंदगानी देख कर

इससे तुम्हें क्या फर्क पड़ेगा
सरकार करेगी जो करेगी
ये तुम्हारा काम थोड़ी न है

कितने भी कानून बना लो
पब्लिक है जो मानती ही नहीं
रोज-रोज नदी में लगाने के लिए
सरकार के पास दाम थोड़ी है